छावनी मंडी के व्यापारियों के दिवालिये होने की खबर से हडकंप

आधा दर्जन बड़े व्यापारियों के चल रहे है नाम, दो सौ करोड़ की वसूली अटकी

दस साल पहले भी बने थे ऐसे ही हालात

प्रदीप जोशी
इंदौर। प्रदेश की सबसे बड़ी छावनी अनाज मंडी में पिछले एक पखवाड़े से व्यापारियों में घबराहट का माहौल कायम  है। कारण आधा दर्जन से ज्यादा बड़े व्यापारियों और आढतियों के हाथ ऊंचे करने की खबर मंडी में फैली हुई  है। प्रमुख कारण व्यापार में मंदी के दौर को माना जा रहा है जो नोट बंदी के बाद से शुरू हुई है। दुसरी तरफ दिवालिया होने के कगार पर पहुंच चुके प्रतिष्ठान खुद इसके लिए जिम्मेदार बताए जा रहे है। पर मंडी में बाते दुसरी चल रही है देनदारी के मामले में गले गले तक फंसे इन व्यापारियों ने दुसरे धंधों में खास कर रीयल इस्टेट और सरकारी ठेकों में लंबा इन्वेस्टमेंट किया जिसमे वे फंस गए। हाल यह है कि जमा जमाया पुश्तेनी धंधा भी संकट के घेरे में आ गया है। लंबे सौदों में फंसे इन व्यापारियों और आढ़तियों को बाजार के करीब देढ़ से दो सौ करोड़ रुपए चुकाना है। बीते छह माह से लेनदारों को लगातार टाले दे रहे इन बड़े प्रतिष्ठानों की माली हालत देख मंडी के व्यापार पर बुरा असर पड़ रहा है वही कई छोटे व्यापारी इनकी चपेट में आ सकते है।

प्रतिष्ठित फर्म में फंसे है पचास करोड़ से ज्यादा

हाथ ऊंचे करने वालों में जिस व्यापारी फर्म का नाम सबसे ज्यादा चल रहा है उसका मंडी में अपना रसूख रहा है। अनाज व्यापारी ऐसोसिएशन और सहकारी बैंक के संचालक मंडल में दखल रखने वाले बड़े व्यापारी पर बाजार के पचास करोड़ से ज्यादा की देनदारी है। कुछ व्यापारियों के पास चेक दिए है पर बताया जा रहा है कि दुसरी तरफ चेक बुक गुम होने की शिकायत भी दर्ज करवा दी गई है। ताकि चेक अनादरित होने की दशा में खुद को बचाया जा सके। बहरहाल बड़ी फर्म की बिगड़ी हालत ने बाजार की दशा को भी बिगाड़ने का काम कर दिया है।

छह माह पहले लुढ़क चुकी है एक फर्म

छावनी मंडी में हालात अचानक ही नहीं बने है, करीब छह माह पहले एक फर्म से इसकी शुरूआत हुई थी। हालांकि इस व्यापारी फर्म पर पांच करोड़ के करीब की देनदारी थी। शुरूआत में दो दो माह में व्यापारियों को पैसा दिया और दुसरे सौदे किए जाते रहे, फिर अचानक पेमेंट बंद कर दी गई और स्पष्ट कह दिया कि जब व्यवस्था होगी तभी पेमेंट होगा। इसके चलते कई दलाल और व्यापारियों की कलम उलझ गई।

ठेकेदारी में उलझ गए कई व्यापारी

शहर के कई प्रोजेक्ट हाथ में लेने वाली कंस्ट्रक्शन कंपनी के चक्कर में अनाज व्यापारियों का लंबा माल फंस गया है। इस फर्म की माली हालत बहुत खराब हो चुकी है। कई प्रोजेक्ट में कंपनी का काफी पैसा लग चुका है जिसका भूगतान सरकारी ऐेजेंसियों ने किया नहीं है। उधर कुछ नए प्रोजेक्ट में काम पूरा ना होने के कारण मोबलाईजेशन के बाद की राशि रोक ली गई। यही कारण है कि बाजार से उठाए पैसों की अदायगी भी रूक गई है।

दस साल पहले जैसे बने हालात

छावनी मंडी में दस साल पहले भी इसी प्रकार के हालात बने थे। तब हुंडी चिट्ठी वालों के कारण बाजार की बड़ी रकम उलझ गई थी जिसके चलते कई फर्मो के हाथ खड़े करने जैसे हालात बन गए थे। तब भी व्यापारियों और आढ़तियों को लंबा फटका लगा था।

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